नीरज आर्या.कोरोना ने सिर्फ पुलिस का कामकाज ही नहीं बल्कि जिंदगी जीने का तरीका भी बदल दिया। एक-दूसरे के साथ रहने वाले पुलिस दंपती अब अलग रहने को मजबूर हैं, वहीं उनके बच्चे नाना-नानी के घर मम्मी-पापा से दूर हो गए हैं। फोन पर बातचीत और वीडियो कॉलिंग ही बच्चों की एक झलक देखने का एक मात्र विकल्प बचा है।
एक छत के नीचे रहने वाले चार सदस्य अलग-अलग
भिवानी हरियाणा का रहने वाला कुलदीप दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल है। उनकी तैनाती करोलबाग गफ्फार मार्केट पीसीआर यूनिट की पराक्रम वैन में हैं। कुलदीप की पत्नी स्वीटी मधुबन करनाल ट्रेनिंग सेंटर हरियाणा पुलिस में एएसआई के पद पर कार्यरत है। दंपती की 7 वर्ष की बड़ी बेटी और पांच साल का बेटा है। देश में लॉकडाउन हुआ तो कुलदीप ने अपने दोनों बच्चे उनके नाना नानी के घर दादरी हरियाणा छोड़ दिए। 25 से ज्यादा दिन गुजर चुके हैं लेकिन दंपती एक-दूसरे से मिले तक नहीं। वे एक-दूसरे का हालचाल फोन पर ले लेते हैं और अपने बच्चों की झलक वीडियो कॉलिंग कर देख लेते हैं। कुलदीप ने कहा देश में अचानक से ऐसे हालात बन गए जिस वजह से एक छत के नीचे रहने वाले 4 सदस्य अलग-अलग तीन जगह रहे हैं।
पति-पत्नी ड्यूटी पर बच्चा पड़ोसी के घर
सफदरजंंग एन्क्लेव सब डिवीजन एसीपी ऑफिस में राहुल कांस्टेबल के पद पर कार्यरत हैं, जबकि उनकी पत्नी रेनू भी इसी पद पर पीटीएस द्वारका में वर्किंग हैं। इनका एक बेटा है जो तीसरी कक्षा का छात्र है। यह परिवार पुष्प विहार सेक्टर 7 में रहता है। लॉकडाउन और कोरोना वायरस की वजह से इस दंपती की ड्यूटी फील्ड में अलग-अलग जगह लगती है। राहुल के बेटे का स्कूल भी बंद है, ऐसे में वह ड्यूटी जाते समय उसे पड़ोस में रहने वाली एक आंटी के घर छोड़कर चला जाता है।
अफसरों ने छोटी बच्ची के खातिर छुट्टी कर दी मंजूर
अमर कॉलोनी गोल चक्कर के पास रहने वाला रंजन कुमार दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल है। उनकी डेढ़ साल पहले ही शादी हुई, जिनकी पत्नी रेशमा सीलमपुर डिस्ट्रिक में है। दंपती की 7 महीने की बच्ची है। लॉकडाउन के पहले चरण में कुछ दिनों तक उनकी पत्नी-बेटी से दूर रहकर ड्यूटी करती रही, लेकिन बच्ची मां का दूध पीती है। महिला ने अपने सीनियर्स से बच्ची की खातिर छुट्टी ली जो मंजूर कर दी गई।
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