डेमोक्रेटिक पार्टी की तरफ से राष्ट्रपति पद काउम्मीदवार बनने की कोशिश में लगे सीनेटर बर्नी सैंडर्स ने अपनी दावेदारी वापस ले ली। बुधवार रात उन्होंने पार्टी के दूसरे उम्मीदवार जोबिडेन के पक्ष में नाम वापस लेने का ऐलान किया। सैंडर्स का यह फैसला चौंकाने वाला है, क्योंकिउन्होंने प्राईमरी फेज के चुनाव में दो जगह सेजीत हासिल की थी। वहीं, लोवा राज्य में वेदूसरे स्थान पर रहे थे। उनकी रैलियों में काफी लोग भी जुट रहे थे। जानकार मान रहे थे कि सैंडर्सवर्तमान राष्ट्रपति और रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रम्प को तगड़ी चुनौती पेश करेंगे।78 साल के सैंडर्स ने 2016 में हिलेरी क्लिंटन को चुनौती दी थी। हालांकि, तब वे पीछे रह गए थे। अमेरिका में नवंबर में राष्ट्रपति चुनाव होना प्रस्तावित हैं। माना जा रहा है कि अगर डेमोक्रेटिक पार्टी सत्ता में आती और बिडेन राष्ट्रपति बनते, तो नंबर दो यानी उप राष्ट्रपति सैंडर्स ही बनते।
डेमोक्रेट्स को सैंडर्स की वजह से डोनेशन भी मिला
सैंडर्स लोवा में बहुत कम अंतर से दूसरे स्थान पर रहे थे। जबकि न्यू हैम्पशायर और नेवादा में उन्होंने जीत हासिल की थी। डेमोक्रेटिक पार्टी को उनकी वजह से काफी डोनेशन मिला था। उनकी रैलियों में भी काफी भीड़ जुटी थी। 2016 में जब हिलेरी क्लिंटन प्रत्याशी बनी थीं, तब उन्होंने सैंडर्स का‘सबके लिए स्वास्थ्य सेवा’ का नारा अपनाया था। खास बात ये है कि लोवा में सैंडर्स दूसरे स्थान पर थे, जबकिबिडेन यहां चौथे नंबर पर रहे थे।
महिलाओं में लोकप्रियता न होने से पीछे हटेसैंडर्स
एनबीसी न्यूज कीरिपोर्ट के मुताबिक, सैंडर्स का दावा इसलिए भी मजबूत था क्योंकि अश्वेत अमेरिकियों में उनकी लोकप्रियता सबसे ज्यादा है। हालांकि, उनके श्वेत अमेरिकी समर्थक बिडेन के साथ ज्यादा थे। माना जाता है कि इसी वजह से मिशीगन जैसे बड़े राज्य में सैंडर्स पीछे रह गए। यह भी कहा जा रहा है कि महिलाओं में कम लोकप्रियता भी उनके नाम वापस लेने की एक वजह रही। उनकी ही पार्टी के एक नेता ने जनवरी में कहा था कि सैंडर्स किसी महिला को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार नहीं देखना चाहते। सैंडर्स ने यह आरोप नकारा था, लेकिन तब तक काफी नुकसान हो चुका था। उनके समर्थकों पर महिलाओं से हाथापाई के आरोप भी लगे थे।
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