(मोइन शेख)जो लोग कोरोनावायरस और उसकी जांच से डरे हुए हैं, उनके सामने सूरत के लैब टैक्नीशियन चेतन चौहान एक मिसाल हैं।चेतन 4 साल से रीढ़ के कैंसर से जूझ रहे हैं, लेकिन फिर भी अपने इलाज को दरकिनार कर लगातार ड्यूटी कर रहे हैं।
चेतन कतारगाम के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र (पीएचसी) में लैब टैक्नीशियन हैं। कोरोना संक्रमण की जांच के लिए रोजाना 26 सैंपल लेते हैं। जांच के लिए आए लोगों का मनोबल बढ़ाने के लिए वे कहते हैं,‘मुझे देखिए मुझे कैंसर है। इसके बाद भी मैं जानलेवा संक्रामक रोग की जांच के सैंपल जुटाने में लगा हूं।’
मुझे गर्व है संकट के दौरान काम करने पर- चेतन
चेतन बताते हैं कि सामान्य लोगों के मुकाबले कैंसर रोगी की रोग-प्रतिरोधी शक्ति कम होती है, इसलिए कैंसर विशेषज्ञ वायरल इंफेक्शन से बचाव की बात कहते हैं।मुझे गर्व है कि मौजूदा संकट के दौरान मुझे कर्तव्य निभाने का मौका मिल रहा है। मैं समाज, देश और मानवता के काम आ पा रहा हूं।
चिंतित हैं परिजन, बढ़ाते हैं मनोबल
बकौल चेतन, परिवार चिंतित है लेकिन सभी पढ़े-लिखे और संवेदनशील हैं।वक्त की जरूरत को समझते हैं, इसलिए सहयोग के साथ मेरा मनोबल भी बढ़ाते हैं। काम से डर नहीं है, लेकिन पीपीई सूट पहनने के बाद एक मरीज के रूप में मुझे सांस लेने में दिक्कत होती है। सूट की डिजाइन ही ऐसी है कि कोई व्यक्ति लगातार लंबे समय तक इसमें नहीं रह सकता।
इलाज के लिए मुंबई नहीं गए, अफसर कर रहे तारीफ
चेतन को नियमित इलाज के लिए मुंबई जाना था। समय भी मिल चुका था, लेकिन वे नहीं गए। उनकी इस जीवटता और जज्बे के लिए चेतन के अधिकारी भी तारीफ कर रहे हैं।
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